Gujarat

  Dec 24 2007  | Views 180 |  Comments  (1)
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रविवार तारीख 23 दिसम्बर 2007। स्थान गांधीनगर। 
गांधीनगर के चुनाव के नतीजे आ चुके हैं। भारतीय पार्टी या यों कहें कि नमो को जनता का समर्थन प्राप्त हुआ है। खैर चुनाव के लिये दोनो अहम पर्टियों ने बड़ी जी जान से मेहनत की। कड़ी मेहनत और उसके नतीजे के आने के पश्चात जैसा कि सभी लोग कुछ विश्राम चाहते हैं दोनो पर्टियों के नेता और कुछ also ran एवं ख्वामख्वाह किस्म के नेता गण भी unwind कर रहें थे। शाम लगभग सात या साढ़े सात का समय था। भोजन में अभी समय था। सभी involved नेता गण एक टेबल के इर्द गिर्द इकट्ठा हो unwind और relax करने हेतु दो दो पेग ढाल चुके थे। अब खुले दिल से एक दूसरे के साथ अपना अपना गम गलत करते हुए कुछ इस प्रकार की बातें कर रहें थे। और मैं साकी सम इस वाकये का मूक दर्शक भर था। 
मादाम: क नम रे जीत कर भी क्या देसी सर्व करवाते हो, इतालवी कंही बेहतर होती। 

नमो: यह क नम रे क्या कह रहीं हैं। आप बहुत जल्दी नाम भुल गयीं। अब यह आपके भुलक्कड़पन के कारण ही आप चुनाव में हार गयीं हैं। आपने कहा था कि हिन्दु मुस्लिम के मुद्दे को इस चुनाव में तवज्जो नहीं देंगी। उसके बाद आपने उसे भूल कर मुझे मौत का सौदागर कहा। आप एक और बात भूल रहीं हैं कि जब आप मुस्लिम मुस्लिम चिल्लाती हैं तब मेरे बिना कुछ कहे अपने आप मेरे हिन्दु वोटों की संख्या में बढ़ोत्तरी की प्रक्रिया आरम्भ हो जाती है। यह इस बात का परिचय है कि आपने कक्षा छठी (आपके पति को तो छठी का दूध भी याद था, और आपको छठी कक्षा का पाठ भी याद नहीं) में पढ़ाया हुआ न्युटन का तृतीय सिद्धान्त कि "हर क्रिया के प्रत्युत्तर में ठीक उसी की बराबर शक्ति की प्रक्रिया भी होती है", भूल चुकी हैं। 

मदाम: अब तुम जो भी कहो, चुनाव आयोग से फटकार तो तुम्हे मुझसे अधिक जोरों की मिली। यह मेरे ही संवाद ' मौत का सौदागर' का असर था कि तुम आपा खो बैठे। और तुमने सोहराब की हत्या के सेहरा अपने सर पर बांध लिया। क्या फजीहत उठानी पड़ी तुम्हें , इसके फल स्वरुप। तुम कितनी आसानी से मेरे जाल में उलझ गये। 

नमो: हाँ, यह जाल तो आपने बड़ी सफायी से लगाया था। मैं जानता हूं कि इस जाल को बांधने में मुख्य भुमिका आपकी नहीं , बल्कि यहां नेपथ्य में खड़े कुल्हड़ से सुड़कते कपमा के कामरेड की है। लेकिन कामरेड गुजरात को चीन समझ बैठे। वैसे चीन को भी वे कितना समझते हैं। लेकिन गुजरात में इन प्रक्रियाओं से वोट नहीं बटोरे जा सकते। सिर्फ अंग्रेजी समाचार पत्रों की सुर्खियां ही बटोरी जा सकती है। और भारत में अंग्रेजी समाचार पढ़ने वालों की सख्या नगण्य है, यह तो हम सन 2004 का चुनाव हार कर ही समझ गये थे। आपने उससे सीख नहीं ली। यहां दो अलग ग्रहों के लोग रहते हैं एक वे जिन्हें हम भारतीय कहते हैं एव दूसरे हैं INDIANS और जो सन 2004 के चुनाव अभियान India Shining के नायक थे। 

मादाम : मैने तुम्हारी पार्टी को बुरी तरह से चोट पंहुचायी है। राम तो एक विभीषण के सहारे ही युद्ध जीत गये थे। मैने तो तुम्हारे खिलाफ विभीषणों की पूरी जमात खड़ी कर दी है। 

नमो: मदाम आप फिर भूल रही हैं। स्वामी परमहंस ने कहा था कि मुगलों के सिक्के अंग्रेजों के जमाने में नहीं चलते। और आप रामयण के दांव पेंच कलियुग की इक्कीसवीं सदी में चलाने का प्रयास कर रही हैं। विभीषण रावण के खिलाफ राम की मदद कर सकता था, लेकिन आज जब चतुर्दिक सिर्फ रावण ही रावण के खिलाफ युद्ध कर रहें हो तो विभीषण के हिस्से सिर्फ देश निकाला ही आता है। वह नितान्त अशक्त हो सिर्फ इश्तेहार छाप कर consultant की नौकरी हेतू अर्जी लगाने का काम कर सकता है। उससे अधिक कुछ नहीं। और फिर आपके दल में कौन से स्वामी भक्त हनुमान भरे पड़े हैं। वहाँ भी सिर्फ विभीषणों की जमात है। सब के सब लंका के राज्य के हेतू भाई की हत्या की सुपारी उठाने के लिये अति आतुर हैं। 
क्रमशः

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